लोगों की मानें तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से ज्यादा प्रसूति इस महिला कर्मी के अवैध प्रसूति केंद्र में करवाई जाती है। आम जनमानस में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व उच्चाधिकारियों के मिलीभगत से ही अवैध रुप से चल रहे प्रसूता केन्द्रों को संरक्षण प्रदान किया गया है, क्योंकि बिना मिलीभगत के किसी प्रकार का प्रसूता व स्वास्थ्य केन्द्र चलाना नामुमकिन है। जांच के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा कर दिया जाता है।
ज्ञात हो कि कुछ ही महीने पहले तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा एक अवैध अल्ट्रासाउण्ड सेण्टर को सील किया गया था जो सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से मात्र 10 कदम की दूरी पर फल-फूल रहा था। नगर के कई अल्ट्रासाउण्ड केन्द्र बिना किसी महिला स्टाफ के ही चलाया जा रहा है। ऐसे केन्द्र पर सिर्फ पुरुष ही जांच कर रहे हैं। ऐसे में महिलाएं असहज महसूस करती हैं परंतु मज़बूरी में जांच करवा रही हैं। ऐसे केंद्रों पर कार्यवाही नहीं होती।
सूत्रों की मानें तो जब ऐसे अवैध केंद्रों के खिलाफ जिला प्रशासन कार्यवाही करना चाहती है तो उन्हीं के विभाग के लोग केंद्र संचालकों को सूचित कर दिया जाता है। इसके पश्चात भारी मात्रा में अवैध वसूली भी की जाती है। ऐसे में देखना यह है कि क्या ऐसे अवैध प्रसूता केंद्र संचालकों के ऊपर प्रशासन किसी प्रकार की कोई कार्यवाही कर पाने में सक्षम है या नहीं? उनको संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी कार्यवाही होती है या नहीं?
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